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Sri Sera Wali Mata


Sri Sera Wali Mata

माता दुर्गा हिंदू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक हैं, जिन्हें शक्ति, साहस और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। “शेरावाली माता” के रूप में वे विशेष रूप से पूजी जाती हैं, क्योंकि उनका वाहन शेर है। शेर पर सवार माता दुर्गा यह दर्शाती हैं कि वे भय, अहंकार और बुराई पर पूर्ण नियंत्रण रखती हैं।

माता दुर्गा को “आदि शक्ति” भी कहा जाता है, यानी समस्त सृष्टि की मूल ऊर्जा। जब भी संसार में अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब माता दुर्गा विभिन्न रूपों में प्रकट होकर धर्म की रक्षा करती हैं।

शेरावाली माता का स्वरूप

शेरावाली माता का स्वरूप अत्यंत दिव्य और शक्तिशाली होता है। उनके कई हाथ होते हैं, जिनमें विभिन्न अस्त्र-शस्त्र होते हैं जैसे त्रिशूल, तलवार, चक्र, गदा आदि। ये सभी अस्त्र अलग-अलग देवताओं द्वारा उन्हें प्रदान किए गए थे, ताकि वे बुराई का नाश कर सकें।

उनका वाहन शेर साहस और शक्ति का प्रतीक है। माता का शांत चेहरा यह दर्शाता है कि वे शक्ति के साथ-साथ करुणा और ममता की भी देवी हैं।

 महिषासुर वध की कथा

माता दुर्गा की सबसे प्रसिद्ध कथा महिषासुर के वध से जुड़ी है। महिषासुर एक शक्तिशाली असुर था, जिसने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। तब सभी देवताओं ने मिलकर अपनी शक्तियों से माता दुर्गा का निर्माण किया।

माता दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और अंततः उसका वध कर दिया। यह विजय बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसी कारण नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।

नवरात्रि और माता की पूजा

नवरात्रि माता दुर्गा का सबसे प्रमुख पर्व है, जो साल में दो बार आता है—चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि। इन नौ दिनों में माता के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जैसे शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा आदि।

भक्त इन दिनों व्रत रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और माता से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिरों में विशेष सजावट और पूजा-अर्चना होती है।

शेरावाली माता की पूजा विधि

आवश्यक सामग्री:

लाल कपड़ा, फूल (विशेषकर लाल फूल), नारियल, अगरबत्ती और दीप, मिठाई या फल, रोली और चावल

पूजा विधि:

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ करके माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। दीपक और अगरबत्ती जलाएं। माता को लाल फूल, रोली और चावल अर्पित करें। नारियल और फल चढ़ाएं। दुर्गा मंत्र या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

शेरावाली माता दुर्गा की आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।

उज्ज्वल से दो नैना, चंद्र बदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे।

रक्त पुष्प गल माला, कंठन पर साजे॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।

सुर-नर-मुनि जन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुंडल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥

शुम्भ-निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

चंड-मुंड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरू।

बाजत ताल मृदंगा, और बाजत डमरू॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।

भक्तन की दुख हरता, सुख संपत्ति करता॥

जय अम्बे गौरी… 

शेरावाली माता दुर्गा शक्ति, साहस और भक्ति का अद्भुत संगम हैं। वे सिखाती हैं कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हों, अगर हम सच्चे मन से प्रयास करें और ईश्वर में विश्वास रखें, तो हर समस्या का समाधान संभव है।

 उनकी पूजा से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।